These are the penned thoughts that evokes in my mind and took the shape of poems, stories and articles.....
Tuesday, November 28, 2017
Thursday, November 2, 2017
"जन्मदिवस"
( Dedicated to my dearest friend )
प्यारी बीना
तुम्हारा जन्मदिवस मानो बसन्तोत्सव
फूलों की महक से सराबोर हर आँगन
वह अपूर्व दिन कि ऐसा लगे जैसे
होली और दिवाली दोनों गलबहियाँ डाल
चहकती इठलाती आ धमकी हो
कहीं स्वप्निल रंगो की बहार है
तो कहीं उमंगो की आतिशबाजी
जगमगा रहा है हर मंडप का परिसर
और तुम्हारे स्वागत और आगमन को
उल्लासित और पुलकित मन से
व्याकुल हम सब
नतमस्तक हो वंदन करते ईश को
तुम्हारा गौरव पूर्ण यश
सदैव कीर्तिमान रहे
और स्नेहमयी मूर्त तुम
निश्चल भाव से हर्ष पूर्वक
यूँही आयुष्मान रहो !!
Tuesday, October 10, 2017
Wednesday, October 4, 2017
1991 की डायरी
अलमारी को व्यवस्थित करते समय
फिर मिल गयी तुम्हारी वो
१९९१ की एक डायरी
हाँ, तुम्हारी आखिरी डायरी
पर वह सिर्फ एक डायरी नहीं है
उसमे तुम्हारा पूरा अस्तित्व समाया है
.
पहले पन्ने पर लिखा तुम्हारा नाम और पता
हमारा घर , जहाँ आये थे तुम
आखिरी बार उस ताबूत में
खामोश और शिथिल
और फिर वो देह भी सामाप्त
और रह गए तुम बस इस डायरी में सिमट कर
.
बहुत से दोस्तों के नाम , पते, नंबर
और कुछ उनके लिखे पत्र
तुम्हारी मधुर दोस्ती के प्रतीक
शायद , उन्हें तुम आज याद ना हो
पर जीवंत है तुम्हारी दोस्ती
इन पत्रों में बखान स्मृतियों मैं
.
बहुत से बचपन के चित्र
स्कूल और कॉलेज के
डायरी के पन्नो में छुपे हुए
याद दिलाते बचपन के वो दिन
जो हमने गुज़ारे थे साथ
उन्ही गलियों और चौबारों मैं
.
बहुत से कोट्स और कविताएं
जो लिखी थी तुमने कभी
अपने मन के अनकहे भावों को
उकेर कर पन्नो में समोया था
आज भी महकते हैं ये पीले पन्ने
तुम्हारे अस्तित्व के स्पर्श से
.
बहुत से सफलता के परचम
छुए थे तुमने स्कूल और कॉलेज में
पढाई और स्पोर्ट्स के हर क्षेत्र में
हर रेस में सर्वदा प्रथम
ना जाने ज़िन्दगी की रेस से
क्यों आउट हो गए
.
आज फिर मैंने, इस डायरी को
अश्रुपूर्ण नेत्रों से, गले को लगाया है
और प्रेम से सहेज कर फिर से
रख दिया है अपनी अलमारी मैं
तुम साथ हो मेरे , अब भी
! हमेशा रहोगे !
.
तुम्हारी दीदी
Thursday, September 14, 2017
झूठी आस
( एक चिठ्ठी मोदी जी के नाम )
.
झूठी आस तुम्हारी पे
कब तक जियें हम नेता जी ( मोदी जी )
.
वर्षो से धन संचय करती माँ का खजाना बँट गया
बेटों के खातों में जाकर उनका रंग बदल गया
जो माँ अब तक शान से जी थी , टुकड़ो की मोहताज़ हुयी
गौ रक्षा की बात करे क्या उनसे, जो अपने माँ को ना बख्शे
खाली झोली, सूखी छाती , खून के आंसू रोती माँ
झूठी आस तुम्हारी पे, कब तक जियेगी ऐसी माँ
.
शिक्षा के मंदिर में अब ग्यान तराजू पर तुलता है
सोने की चिड़िया के खेतों मैं किसान पेड़ पर लटका है
टका सेर भाजी टका सेर खाजा किस्से कहानियों में पढ़ते थे
अपनी आँखों देख लिया अब खून- पसीना एकही मोल
भक्तों के भगवान् भी बिक गए , धर्म की ठेकदारी में
झूठी आस तुम्हारी पे, कब तक टिकेगी धरती माँ
.
माँग - छीन कर लोगों से नेताओं के साम्राज्य संवर गए
जिनके सर से छत भी हट गयी , ज़िंदा वो कंकाल रह गए
पढ़ लिख कर है युवा भटकता, पुश्तैनी रोजगार भी छिन गए
अर्थ-क्रांति बनी भ्रान्ति , भ्रष्टाचारी सिरमौर बन गए
वर्तमान बिखर गया गर्द में , और भविष्य अन्धकार में
झूठी आस तुम्हारी से , हम भरपाये नेता जी ( मोदी जी )
Friday, August 11, 2017
माँ
माँ , तुम ही हो जननी भी
माँ , तुम ही हो सृष्टि भी
अपने मातृत्व की धरती पर
लहू से अपने सींच कर
तुमने हमे आकार दिया
अपनी साँसों की गर्मी से
प्राणो का संचार किया
अपनी थाली के भोजन से
हमे तृप्त करने को तुमने
खुद से पहले हमे खिलाया
उदर हमारा भरने की खातिर
अपना निवाला भी तज दिया
ज्वर चढ़े , या बाधा कोई
मेरी पीड़ा खुद पर झेल
हर विपदा की ढाल बनी
रात- रात भर जाग के स्वयं
हमे चैन की लोरी दी
अपने अंश के टुकड़े को
दूजे घर मैं ब्याह दिया
मुस्कान मैं आंसू छुपा के अपने
किसी और के घर की बेटी को
अपने अंग लगा लिया
कभी प्रेम से, कभी डाँट कर
गुरु समान प्रखरता से
मार्ग प्रशस्त कराया है
अपने जीवन के अनुभव से
हमको सबल बनाया है
माँ, तुम ज्ञान की गंगा हो
जीवन के हर रूप से तुमने
परिचय हमे कराया है
दुःख और सुख में सामंजस्य
करना हमे सिखाया है
माँ , तुम ही हो जननी भी
माँ , तुम ही हो सृष्टि भी
Tuesday, July 11, 2017
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